लखनऊ: पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के आंकड़े एक सामाजिक न्याय की मुहिम की कठिनाइयों को दर्शाते हैं, लेकिन एक लोकतंत्र में गिनती की महत्ता नकारना संभव नहीं है। अखिलेश यादव ने बताया कि जब सच्ची गिनती और व्यक्तिगत मतदान होंगे, तो उस दिन पीडीए के साथ समाजिक न्याय का असलीकरण होगा।
पीडीए की आंध्रता गाँव से गाँव तक सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक संकेत है। यह इस बात की पुष्टि करता है कि पहले वंचित समाज अब जागा है और अब किसी भी प्रकार के प्रलोभन में नहीं आने वाला है।
इन मोवमेंट्स का उदय और प्रसार समाज की धड़कन को बढ़ाता है, जो सामाजिक न्याय और समानता की मांग को उजागर करते हैं। यह सामाजिक बदलाव की दिशा में गहरी गहराई तक पहुंचने वाले बुनियादी बदलाव की दिशा में उत्साह का संकेत है।
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