नई दिल्ली: राजनीतिक बहस और समाज में विवाद खड़ा करने का तंत्र अक्सर मीडिया के ध्यान का केंद्र रहा है। राहुल गांधी ने हाल ही में एक बयान में इस दिशा में मीडिया को निशाना बनाते हुए कहा कि वह बेरोजगारी की बात नहीं करती है, बल्कि ध्यान भटकाने की कोशिश करती है।
सांसदों की निलंबन और उनके विवादित बयानों के माध्यम से, जनता की आवाज को अवरोधित करने का आरोप भी उन्होंने लगाया है। वे मानते हैं कि सांसदों को सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि देश की जनता की आवाज मानना चाहिए।
मीडिया की जिम्मेदारी होती है समाज को सही दिशा दिखाना, साथ ही सच की खोज में भी होना चाहिए। बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर मीडिया को सक्रिय रूप से चर्चा करनी चाहिए।
इससे पहले कि ध्यान भटकाने के लिए चयन किया जाए, मीडिया को सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी देय दिशा में लाने की जरूरत है। जनता की आवाज को नकारना नहीं, बल्कि सुनना चाहिए – यही सत्यप्रिय और नैतिक पत्रकारिता का सच्चा अर्थ है।
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