जौनपुर। जिले के एक गांव के प्रधान पर अपने परिवार और करीबी रिश्तेदारों को मनरेगा मजदूर बनाकर सरकारी धन का दुरुपयोग करने का आरोप लगा है। यह मामला प्रकाश में आते ही जिला प्रशासन ने इसकी जांच जिला विकास अधिकारी को सौप दिया तथा प्रधान और सेक्रेट्री वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यो पर रोक लगा दिया है। यह मामला सामने आने के बाद अन्य प्रधानों में हड़कंप मच गया है।
सुजानगंज ब्लॉक के साड़ीकला गांव के निवासी राजेंद्र प्रसाद उपाध्याय पुत्र महादेव उपाध्याय ने ग्राम पंचायत में प्रधान सुभाष चंद्र मौर्य पर आरोप लगाया था। आरोप में बताया गया है कि प्रधान ने शासनादेश के खिलाफ अपने ही परिवार व सगे संबंधियों का अलग-अलग जॉब कार्ड बनाकर बिना कार्य ही कई लाख रुपये का भुगतान कराया गया। शिकायत पर उपायुक्त श्रम रोजगार अधिकारी ने जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी दी। जांच में मनरेगा योजना अंतर्गत कराए गए कार्यों में ग्राम प्रधान से संबंधित 15 व्यक्तियों पर 342862 रुपये के दुरुपयोग मिला। इस पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने संबंधित सचिव ग्राम पंचायत को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।स्पष्टीकरण साक्ष्य सहित पत्र प्राप्ति के 21 दिन के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। नोटिस के क्रम में प्रस्तुत उत्तर स्पष्टीकरण प्राप्त होने के बाद सीडीओ ने जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी स्पष्ट जांच आख्या देने को कहा।
जांच प्रक्रिया में विलंब होने पर शिकायतकर्ता अपने अधिवक्ता के माध्यम से उच्च न्यायालय इलाहाबाद में अवमानना याचिका दाखिल कर दिया। इसके क्रम में जांच में पता चला की प्रधान द्वारा मनरेगा मजदूरी भुगतान ही नहीं बल्कि कार्यों में भी लापरवाही की गई है। इसके लिए संबंधित ग्राम प्रधान ग्राम सचिव मनरेगा से संबंधित अन्य कर्मचारी अधिकारी प्रथम दृष्टया दोषी हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि जिला विकास अधिकारी को जांच अधिकारी नामित किया है। जांच की जा रही है। अंतिम जांच से मुक्त होने तक ग्राम पंचायत साड़ीकला के प्रधान व सचिव के सभी वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगाई है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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