यूपी में कांशीराम, छत्तीसगढ़ में नंद कुमार बने रहे सामाजिक न्याय की रीढ़
लखनऊ। सामाजिक कार्य की मशाल को छत्तीसगढ़ में ऐसी जलाई की उस की रोशनी में पूरा छत्तीसगढ़ जगमगाने के साथ उसके प्रकाश की किरणें देश के कोने-कोने में दिखाई पढ़ने लगी। आज नन्द कुमार बघेल पूरे देश में ओबीसी, एससी व एसटी की एक ऐसी बुलन्द आवाज के रूप में ऐसी शोहरत बटोरी जो मुश्किल से लोगों को नसीब होती है।एक सीधे-साधे किसान परिवार में जन्म होने के बावजूद उस पूरी परिपाटी को तोड़ते हुए ओबीसी, एससी, एसटी के शोषण के खिलाफ खुलकर खड़े हुए, बहुत काम किया बेटे को मुख्यमंत्री बनाया।
पहली मुलाकात में पत्रकार बताते ही वे मुस्करा उठे। बोले बहुत मुश्किल से मिले हो। मैंने पूरा जीवन समाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में लगा दिया। हमें आगे बढ़ने में हमारे रास्ते मेंसबसे बड़ी बाधा के रूप में मीडिया वाले हैं। हमारे खिलाफ सही होते हुए भी दुष्प्रचार करते हैं। गलत सूचनाओं से लोग भ्रामित हो जाते हैं। अपनी वाजिब माग व अपनी बात रखने पर मीडिया द्वारा शासन तक पहुंचने की बात तो दूर अपनी बात रखने वालों को ही बिना कारण प्रकरणों में बदनाम किया जाता है। दिल्ली के जंतर-मंतर में धरने के बाद कुछ किसानों ने चूहा खाफर विरोध जताया तो एक चैनल ने खबर चलाई कि किसान चूहे खाने का नाटक कर रहे, हम किसानों के दुःख से इतने दुखी थे कि अभी भी ऐसे किसान है जिन्हें दो जून की रोटी भी नसीब नहीं है, उन्हें चूहे खाना पड़ रहा है। उनके बच्चे पढ़ाई-लिखाई के बारे में सपना भी नहीं देख सकते। उसी में एंकर की यह खबर कि किस्वन चूहे खाने का नाटक कर रहे थे, कलेजा फाड़ गयी। मेरो इच्छा है कि हमारे समाज में जो सक्षम लोग है।

मीडिया हाउस खोले और झूठ लोगों का डटकर मुकावला करें। मेरो उम्र कम है। यह सारा भार आप लोगों के कंधे पर है। राजनीति की ओर आगे बढ़ते हुए उन्होंने कहा कि मैंने राहुल गांधी से कई बार चचर्चा किया कि हम पूर्ण बहुमत से कांग्रेस को सत्ता में ला सकते हैं लेकिन इसके लिए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी में 85 प्रतिशत सदस्य ओबीसी, एससी एवं एसटी और 85 प्रतिशत लोकसभा के टिकट भी इन्हें दे दे तो कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने से कोई रोक नहीं पायेगा। ऐसा नहीं हुआ तो कांग्रेस की वापसी मुश्किल होगी। रजुल गांधी हर बार हा कर लेते है, लेकिन अभी तक धरातल पर दिख नहीं रहा है. अपनी किताब रावण को मत मारो पर चचर्चा करते हुए कहा कि पढ़ना तो शोषण का सच दिखाई पड़ेगा।
कुछ दिन बाद ही उनकी किताब को छत्तीसगढ़ के गृह विभाग ने बैन लगा दिया। 70 के दशक में उन्होंने हिन्दू धर्म को छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया था।उन्होंने अपनी जाति कुमी पर एक किताब लिखी है। जिसका शीर्षक कुमी, ब्राह्मण की नजरों में क्या क्षत्रिय, वैश्व या शूद्र, पर यह किताब भी काफी चर्चित रही। अपनी किताच एवं आग उगलते बयानों के लिए उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया जाद में कोर्ट ने जमानत दे दी.
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