
Swami Narad Bhagwan Ji Maharaj: गीता आज भी अध्यात्म और जीवन दर्शन का सबसे उत्तम सामंजस्य माना जाता है. महाभारत के युद्ध के समय जब अर्जुन अपने ही लोगों को रण में सामने खड़ा पाते हैं तो वो हथियार डाल देते हैं. उसी वक्त उनके सारथी बने भगवान कृष्ण उन्हें उपदेश देते हैं. उन्हें कर्म व धर्म के सच्चे ज्ञान से अवगत कराते है. गीता देश दुनिया की अनमोल धरोहर में से एक है. यही बात नारद भगवान ने बिहार दौरे पर अपने भक्तो से कही. नारद भगवान अपने गुरु और प्रेरणा के स्त्रोत स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज के विचारों और उपदेशो को आगे बढ़ा रहे है. उन्होंने ही भगवान श्री कृष्णा द्वारा उपदेशित गीता को सरल भाषा में लिखा है. इसे “यथार्थ गीता” नाम दिया गया. प्रयागराज मे हो रहे महाकुंभ मे इसकी भारी मांग है. स्वामी नारद भगवान जी महाराज का आश्रम मीरजापुर में है. तो आइये जानते है नारद भगवान जी महाराज कौन है
सत्य की खोज
स्वामी नारद भगवान जी महाराज बाल्यावस्था मे ही सत्य की खोज में स्वामी अडगड़ानंद जी महाराज के पास आ गए थे. ये मूलतः मिर्जापुर के बरैनी जनपद के रहने वाले है परंतु अब इन्होंने अपना घर परिवार सबको त्याग दिया है. उनका मानना है कि समूचा विश्व मेरा परिवार है और इसके कल्याण के लिए अपना पूरा जीवन लगाना है. अपने गुरु स्वामी अडगड़ानंद जी महाराज के विचारों को आगे बढ़ाना ही अब इनका लक्षय है. बता दें कि इनके कई आश्रम देश के अलग अलग जनपद मे है. बताया जाता है कि नारद भगवान को स्वामी अड़गड़ानंद जी ने बचपन मे ही अपना दत्तक पुत्र और उत्तराधिकारी मान लिया था.
यथार्थ गीता का व्याख्यान
स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने ‘यथार्थ गीता’ का साधारण शब्दों में व्याख्यान किया है. स्वामी जी ने श्रीमदृभागवत गीता पर आधारित एक ग्रंथ ‘यथार्थ गीता’ की रचना की है, जो काफी लोकप्रिय है. इसके उपदेशो को जन जन तक पहुंचाने के लिये नारद भगवान ने पूरे देश का भ्रमण किया है. स्वामी जी से मिलने के लिए यूपी ही नहीं देशभर के बड़े-बड़े राजनेता उनके आश्रम पहुंचते हैं. स्वामी जी का आश्रम मिरजापुर के सक्तेशगढ़ में है.
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