
नई दिल्ली. कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पारित राजनीतिक प्रस्ताव में कई मुद्दों पर पार्टी ने अपनी बात सामने रखी है. कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में जारी बयान में कहा गया कि CWC यह मांग करती है कि सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना जल्द से जल्द आयोजित की जाए. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, और OBC के लिए आरक्षण की 50 फीसदी सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए ताकि हमारे समाज के इन तीन पारंपरिक रूप से वंचित समूहों को और ज़्यादा लाभ मिल सके. आरक्षण उचित माध्यमों से निर्धारित सामाजिक, आर्थिक, या शैक्षिक पिछड़ेपन के आधार पर होना चाहिए.
कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में जारी बयान में कहा गया कि CWC हमारे लोकतंत्र में लगातार आ रही गिरावट से बेहद चिंतित है. न्यायपालिका, चुनाव आयोग और मीडिया जैसी संस्थाओं का कार्यपालिका के दबाव के माध्यम से राजनीतिकरण किया गया है. संसद की साख को खत्म कर दिया गया है.
CWC ने भारत के चुनाव आयोग की सिफारिश पर चुनाव संचालन नियम 1961 में किए गए केंद्र के संशोधन की निंदा की है. जो चुनावी दस्तावेजों के महत्वपूर्ण हिस्सों तक सार्वजनिक पहुंच को रोकता है. यह पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों को कमजोर करता है. जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की आधारशिला हैं. कांग्रेस ने कहा कि हमने इन संशोधनों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. खासकर के हरियाणा और महाराष्ट्र में जिस तरह से चुनाव कराए गए हैं, उसने पहले ही चुनावी प्रक्रिया की सत्यनिष्ठा को खत्म कर दिया है.
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CWC ने पूर्वी लद्दाख में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच पीछे हटने के संबंध में विदेश मंत्री की घोषणा पर विचार किया. यह अप्रैल 2020 के पहले की स्थिति बहाल करने के भारत के घोषित लक्ष्य से बेहद कम है और दशकों में लगे देश के सबसे बड़े क्षेत्रीय झटके को दिखाता है. CWC ने अपनी मांग दोहराई है कि सरकार विपक्ष को विश्वास में ले और LAC की स्थिति के संबंध में संसद में व्यापक चर्चा होने दे. CWC बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमलों में हालिया वृद्धि पर चिंता व्यक्त करती है. पार्टी ने केंद्र सरकार से उनकी सुरक्षा और बेहतरी सुनिश्चित करने के लिए बांग्लादेश सरकार के साथ काम करने का पुरजोर आग्रह किया है.
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